Thursday, 22 September 2016

मन की वृत्तियाँ

मन की वृत्तियाँ

मन में दो परस्पर विरोधी वृत्तियाँ सदैव काम करती रहती हैं। उनमें से किसे प्रोत्साहन दिया जाय और किसे रोका जाय, यह कार्य विवेक बुद्धि का है। यदि सही दिशा में जा रहा है तो उसे प्रोत्साहन दिया जाय और यदि दिशा गलत है, तो उसे पूरी शक्ति के साथ रोका जाना चाहिए। यही हमारे लिए श्रेयस्कर परिस्थितियाँ उत्पन्न कर सकता है। इसलिए समय रहते चेत जाना ही जरूरी है।

शुभ संकल्प वाला मन आशावादी, दूरदर्शी और पुरुषार्थी होता है। वहीं सदा निराश रहने वाला मन कठिनाइयों की बात सोच-सोचकर खिन्न रहने वाला रहता है। वह परिस्थितियों के निर्माण में असमर्थता महसूस करता है। ऐसा नहीं है कि मन बदला न जा सके। प्रयत्न करने पर यह संभव है। इसका सुधार जाना ही जीवन का वास्तविक सुधार है।
जिनने अपने भीतर आशा और उत्साह का वातावरण बना लिया है उज्ज्वल भविष्य का उदीयमान सूर्य उनकी प्रतीक्षा कर रहा है।असफलताएँ, बाधाएँ और कठिनाइयाँ मनुष्य के पुरुषार्थ को जगाने और आगे बढऩे की चेतावनी देने आती हैं वे हमारी शत्रु नहीं हैं।
शुभ संकल्प युक्त मन वाले व्यक्ति छोटी-छोटी असफलताओं की परवाह नहीं करते। वे धैर्य, साहस, विवेक एवं पुरुषार्थ को मजबूती के साथ पकड़े रहते हैं, क्योंकि आपत्ति के समय में यही चार सच्चे मित्र साबित होते हैं।

मनुष्य की शक्तियाँ महान हैं। वीरता शरीर में नहीं मन में निवास करती है। बार-बार अग्नि परीक्षा में से गुजरने के बाद ही सोना कुन्दन हो पाता है। जिस व्यक्ति ने स्वयं को इस कसौटी पर खरा सिद्ध किया है, उनकी जीवन साधना सफल हुई है।

No comments:

Post a Comment