Thursday, 22 September 2016

बड़ी समस्या, छोटे-छोटे हल

बड़ी समस्या, छोटे-छोटे हल

घर का दरवाजा घर से छोटा, दरवाजे पर लगने वाला ताला दरवाजे से छोटा और इस ताले से भी छोटी होती है इसकी कुंजी। कहाँ विशाल घर और कहाँ छोटी सी कुंजी। घर की सुरक्षा की पहली और अंतिम जिम्मेदारी कुंजी की ही है। कुंजी पूरा घर खोल सकती है। कुंजी न हो तो घर कैसे बन्द हो और कैसे खुले। एक बात और है कि घर पर ताला लागा हो और कुंजी न हो तो अपना मकान भी अपने काम का नहीं।
कुंजी की खास बात यह है कि वह एक बारीक से छिद्र से ताले के भीतर प्रवेश करती है और वहीं अपना काम करती है, वहाँ जाकर ताले के भीतरी भाग में संपूर्ण चक्कर लगाती है। उसे इस प्रकार बनाया गया है कि ताले के भीतरी पुर्जों में सधी हुई मात्रा में काम करती है।
देखो!  जितना ख्याल मकान का रहे उतना ही कुंजी का भी रहे।
जिस तरह मकान को खोलने के लिए छोटी सी कुंजी कमाल का काम करती है उसी तरह बड़ी बड़ी समस्याओं का हल छोटी छोटी बातों से, छोटे छोटे सुविचारों से संभव है। वे हमारे भीतर जा कर कुंजी की तरह काम करते है। इस प्रकार आवश्यकता है सम्यक सोच की,आवश्यकता है सम्यक दृष्टि की, सम्यक प्रकार से समस्या के समाधान में विचारों का उपयोग करने की।

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