Thursday, 22 September 2016

सौन्दर्य जीवन का

उपासना, स्वप्न और बीज एक जैसे है। सामान्यतया तो ऐसा लगता है कि इनमें कुछ नहीं है लेकिन इनमे सब कुछ करने की क्षमता है।

उपासना, सपने और बीज। इन तीनों में एक विचित्र सा साम्य है। प्रत्यक्ष रूप में तो ऐसा लगता है कि ये तीनों ही अपने आप में कुछ नहीं लेकिन इनके गर्भ में असीम वैभव भरा पड़ा है। उपासना से आनन्द, सपने से जीवन और बीज से आगे सृष्टि का सृजन होता है। जिस तरह वटवृक्ष के एक बीज के भीतर एक वटवृक्ष और फिर उस एक वटवृक्ष के द्वारा पुनः अनगिनत बीजों का सृजन संभव है। उसी तरह एक उपासना में और सपने में अनंत सृजन की सम्भावना भरी पड़ी है। उपासना के अपने ढंग हो सकते हैं, सपनों के अपने आकार हो सकते हैं और बीज की अपनी बहुगुणन क्षमता हो सकती है परंतु एक बात तो तय है कि ये तीनों ही अपने भीतर वैभव की विशाल सम्पदा संजोए है। बगैर उपासना के परम की आराधना, बगैर सपनों के सार्थक जीवन और बगैर बीज के अग्रिम भविष्य के बीजों का होना अकल्पनीय है। आवश्यकता है इस क्षमता को पहचानने की, आवश्यकता है इनके महत्व को अनावृत्त करने की, आवश्यकता है इसके आचरण में लाने की।


अपने जीवन में सौंदर्य देखना चाहते हो तो आओ जरा मेरे साथ चल कर देखो।

हम में से हर एक के जीवन में यादों का विशाल भंडार भरा पड़ा है।
कुछ मधुर तो कुछ कड़वे,
कुछ आनन्द पूर्ण कुछ पीड़ा दायक,
कुछ अवसाद भरे तो कुछ प्रेरणास्पद।

कुछ ऐसे पल भी हैं कि जिनके कारण हमारा जीवन सँवर गया,  वहीँ कुछ ऐसे पल भी थे कि जो हाथ से फिसल गए और जिनके कारण सुनहरे अवसर का लाभ नहीं ले पाए।

अपनी याददाश्त को टटोल कर जैसा आप देखना चाहते हो वैसे-वैसे चुन कर देख लो, जो जो देखोगे उस-उस के अनुरूप अभी अनुभतियाँ सजग हो जाएगी। चुनाव आपका ही है कि आप इनमें से क्या पसंद करते हैं।

बेहतर ता यही होगा कि आप सुखानुभूति वाले पल चुनें। वे आपको गुदगुदाऐगे। आप और भी आनन्दित महसूस करेंगे। 

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