जीवन का उत्सव
हर सुबह मेरा एक नया जन्म होता है और मेरा यह दिन मेरे लिए एक संपूर्ण जीवन के बराबर है । मैं आज वह सब कुछ करूँगा जिसके लिए मेरे परमात्मा ने इस धरती पर मुझे जन्म दिया है । मेरा दुनिया में जीना व दुनिया से जाना दोनों ही सुरुचिपूर्ण होने चाहिए ।
"कीर्तिर्यस्य स जीवति।"
कायर व कमजोर होकर नहीं अपितु स्वाभिमान व आत्मज्ञान के साथ जीवन को जीना कला है। भगवान ने महान् कार्य करने हेतु हमारा सृजन किया है।
इसलिए न बहुत भागो! न बहुत भोगो !! हड़बड़ा कर भागने वाले कायर, कमजोर लोग हैं तथा भोगी तो अविवेकी ही होते हैं। भागम-भाग तो दुनियाँ में सदा से मची है। हम भी इससे न बच पाएँगे। यहाँ हर कोई चार पुरुषार्थ - धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष में से किसी न किसी को या सब को पाने के लिए भाग रहा है, लेकिन इस भागने में खुद को नहीं भूलना है।
रात विश्रान्ति के लिए, दिन भर का श्रम दूर करने के लिए थी। रात अनचाहे, अचीते स्वप्नों से भरी हो सकती है
अतः अब जागो !
जागो! जागने पर ही सवेरा ज्ञात हो पाएगा। बिना जागे सवेरा न देख पाओगे। जागते ही ऊषा की रक्तिम रश्मियाँ हमारा स्वागत करेगी। और जागने पर मन चाहे स्वप्न देख पाओगे। भुवन भास्कर परमात्मा का अव्यय स्वरूप है। अव्यय याने जो खर्च करे पर उसके पास खूटे ना। वह इस रूप में करोड़ों साल से ऊर्जा खर्च कर रहा है पर खुटी नहीं। आज भी वह ऊर्जा लेकर आया है। घर बैठे पा लो। जीवन एक उत्सव है। यह जीवन परमात्मा का सबसे बड़ा उपहार है। यह देह देवालय, शिवालय व भगवान का मन्दिर है। यह शरीर अयोध्या है। इसमें अपने राम का, अपने इष्ट का एहसास करो।
"जीवन में सत्कर्म के फूलों की खेती होगी तो सौंदर्य और सुगन्ध एक साथ आवेगी।"
हर सुबह मेरा एक नया जन्म होता है और मेरा यह दिन मेरे लिए एक संपूर्ण जीवन के बराबर है । मैं आज वह सब कुछ करूँगा जिसके लिए मेरे परमात्मा ने इस धरती पर मुझे जन्म दिया है । मेरा दुनिया में जीना व दुनिया से जाना दोनों ही सुरुचिपूर्ण होने चाहिए ।
"कीर्तिर्यस्य स जीवति।"
कायर व कमजोर होकर नहीं अपितु स्वाभिमान व आत्मज्ञान के साथ जीवन को जीना कला है। भगवान ने महान् कार्य करने हेतु हमारा सृजन किया है।
इसलिए न बहुत भागो! न बहुत भोगो !! हड़बड़ा कर भागने वाले कायर, कमजोर लोग हैं तथा भोगी तो अविवेकी ही होते हैं। भागम-भाग तो दुनियाँ में सदा से मची है। हम भी इससे न बच पाएँगे। यहाँ हर कोई चार पुरुषार्थ - धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष में से किसी न किसी को या सब को पाने के लिए भाग रहा है, लेकिन इस भागने में खुद को नहीं भूलना है।
रात विश्रान्ति के लिए, दिन भर का श्रम दूर करने के लिए थी। रात अनचाहे, अचीते स्वप्नों से भरी हो सकती है
अतः अब जागो !
जागो! जागने पर ही सवेरा ज्ञात हो पाएगा। बिना जागे सवेरा न देख पाओगे। जागते ही ऊषा की रक्तिम रश्मियाँ हमारा स्वागत करेगी। और जागने पर मन चाहे स्वप्न देख पाओगे। भुवन भास्कर परमात्मा का अव्यय स्वरूप है। अव्यय याने जो खर्च करे पर उसके पास खूटे ना। वह इस रूप में करोड़ों साल से ऊर्जा खर्च कर रहा है पर खुटी नहीं। आज भी वह ऊर्जा लेकर आया है। घर बैठे पा लो। जीवन एक उत्सव है। यह जीवन परमात्मा का सबसे बड़ा उपहार है। यह देह देवालय, शिवालय व भगवान का मन्दिर है। यह शरीर अयोध्या है। इसमें अपने राम का, अपने इष्ट का एहसास करो।
"जीवन में सत्कर्म के फूलों की खेती होगी तो सौंदर्य और सुगन्ध एक साथ आवेगी।"
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